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जय शनिदेव - यहां क्लिक् करें
(सर्वांग सुंदर ग्रह शनि, प्रयागकूले यमुना तटे वा सरस्वती पुण्यजले गुहायाम् ।
यो योगिनां ध्यान गतोSपि सूक्ष्मस्तस्मै नम: श्री रविनंदनाय्॥ )
॥ Shani Ashtothara Shat Namavali॥ - यहां क्लिक् करें
( 108 Names of Shani Dev with meaning )
जय हनुमान - यहां क्लिक् करें
( हनुमान जी की उत्पति के चार प्रमुख उद्देश्य,अलग अलग देवताओं से मिले हुए वरदान, हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने का कारण,
श्री हनुमत्सहस्त्रनाम स्तोत्रम - यहां क्लिक् करें
( जय हनुमान 'रघुपतिप्रियभक्तं नमामि', हनुमत्सहस्त्रनाम पाठ की महत्ता, हनुमत्सहस्त्रनाम पाठ की विधि, )
जय हनुमान 'रघुपतिप्रियभक्तं नमामि' - यहां क्लिक् करें
(श्री हनुमान जी के 1000 नाम (1000 names of hanuman ji)
हनुमान बजरंग बाण- यहां क्लिक् करें
(Hanuman Bajrang Baan, पुजन सामग्री, पाठ विधि step by step )
हनुमान बाहुक- यहां क्लिक् करें
( हनुमान बाहुक पाठ विधि, छप्पय, झूलना, घनाक्षरी, सवैया )
हनुमान साठिका - यहां क्लिक् करें
( हनुमान साठिका का प्रतिदिन पाठ करने से मनुष्य को सारी जिंदगी किसी भी संकट से सामना नहीं करना पड़ता ।)
भगवान शिव - यहां क्लिक् करें
(शिव स्वरूप सूर्य, शिव स्वरूप शंकर जी, जानिए शिव के 12 ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव की पुत्री अशोक सुंदरी
शिव पूजन विधि - यहां क्लिक् करें
(संकल्प विधि तथा मंत्र, step by step)
महाशिवरात्रि - यहां क्लिक् करें
(महाशिवरात्रि पूजन विधि, पौराणिक कथायें, भगवान शिव का समुद्र मंथन में निकला हुआ विष पीना )
श्रावण व्रत - यहां क्लिक् करें
( प्रथम सोमवार, द्वितिय सोमवार, त्रितिया सोमवार, चतुर्थ सोमवार)
शिव काँवड़ - यहां क्लिक् करें
( गोमुख व हरिद्वार २. देवघर ( बैद्यनाथ धाम) , काँवड़ पूजन विधि, काँवड़ संबंधी कुछ नियम, )
अमरकथा - यहां क्लिक् करें
( श्री अमरनाथ की गुफा का रहस्य, श्री सुर्यनारायण का पूजन, बालखिल्य तीर्थ का महात्म्य, मामलेश्वर तीर्थ की उत्पति की कथा, भृगुपति तीर्थ, श्री लम्बोदर की कथा, रम्जनोपल की कथा, स्थानु-आश्रम( चन्दबाड़ी), पिस्सू घाटी, शेषनाग पर्वत, हत्यारा तालाब, पंचतरनी गंगा, डमारक देवता की कथा, गर्भ-योनि की महिमा, अमरेश महादेव, कबूतरों का रहस्य, श्री बूढ़े अमरनाथ की कथा)
अमर कथा की महिमा - यहां क्लिक् करें
( अमरनाथ में अमरकथा जब कही, सुनी थी पार्वती, उत्तराखण्ड में लगा आसन बैठे हैं कैलाशपति)
श्री शुकदेव का जन्म - यहां क्लिक् करें
( भगवान शंकर की आज्ञा पाकर कालग्नि ने ऐसा हीं किया और अदृश्य हो गया। जिस आसन पर भगवान श्री शंकर बैठे थे )
श्री शुकदेव का महाराज जनक को गुरु धारण करना- यहां क्लिक् करें
( शुकदेव जी फिर इस संसार में गुरु की खोज में इधर-उधर घूमने लगे। मगर अपने से बढ़कर ज्ञानी उनको कहीं नहीं मिला। )